केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड
केन्द्रीय भूमि जल प्राधिकरण
केन्द्रीय भूमि जल प्राधिकरण का गठन पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के तहत देश में भूजल संसाधनों के विकास एवं प्रबन्धन के विनियमन एवं नियन्त्रण के उद्देश्य से किया गया है ।
अधिकार एवं कार्य:
इस प्राधिकरण को निम्नलिखित अधिकार प्रदत्त हैं:-
(i) पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम, 1986 की धारा 3 की उपधारा (2) में उल्लिखित सभी मामलों के संबंध में निर्देश जारी किरने तथा ऐसे उपाय करने हेतु उक्त अधिनियम की धारा 5 के तहत अधिकारों का प्रयोग करना ।
(ii) उक्त अधिनियम की धारा 15 से 21 में शामिल दंड प्रावधानों का प्रयोग करना ।
(iii) देश में भूजल के प्रबन्धन एवं विकास का विनियमन एवं नियन्त्रण करना तथा इस उद्देश्य के लिए आवश्यक विनियामक निर्देश जारी करना ।
(iv) पर्यावरण (सुरखा) अधिनियम, 1986 की धारा 4 के तहत अधिकारियों की नियुक्ति हेतु अधिकार का प्रयोग करना ।
विनियामक उपाय:
- केन्द्रीय भूमि जल प्राधिकरण 802 अति दोहित एवं 169 गंभीर आकलन इकाईयों में उद्योगों/परियोजनाओं द्वारा भूजल दोहन का विनियमन कर रहा है । इन गंभीर क्षेत्रों की सूची राज्य प्रदूषण बोर्ड तथा पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भेज दी गई है तो नई परियोजना/ उद्योगों को स्वीकृति हेतु सीजीडब्ल्यूए को संदर्भित करता है ।
- सीजीडब्ल्यूए ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और दीव में भूजल संसाधनों के विकास के नियन्त्रण एवं विनिमय के लिए 162 गंभीर/अति दोहित क्षेत्रों को अधिसूचित किया है । इन क्षेत्रों में विनियामक उपाय लागू करने के लिए पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत संबंधित आयुक्त/जिला मजिस्ट्रेट को इन अधिसूचित क्षेत्रों में भूजल विकास के विनियमन के आदेश दिए गए हैं ।
- अधिसूचित क्षेत्रों में नए भूजल संरचनाओं का निर्माण वर्जित है । नलकूप वेधन की अनुज्ञा केवल पेयजल आपूर्ति में संलग्न सरकारी अभिकरणों को ही दी जा रही है ।
- सीजीडब्ल्यूए ने आंध्रप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, पांडिचेरी, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, गुजरात, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश में मौजूदा भूजल दोहन संरचनाओं के पंजीकरण हेतु तत्काल कार्रवाई किए जाने वाले 65 क्षेत्रों को अधिसूचित किया है ।
भूजल कानून:
राज्यों को भूजल कानून के अधिनियम में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से जल संसाधन मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को भूजल विकास के विनियमन एवं नियन्त्रण संबंधी माडल बिल परिचालित किया गया है । अब तक आंध्रप्रदेश, गोवा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, लक्षद्वीप एवं पांडिचेरी द्वारा भूजल कानून का अधिनियम एवं कार्यान्वयन किया गया है ।
महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं एवं प्रपत्र
- सीजीडब्ल्यूबी के जिला नोडल वैज्ञानिक तथा राज्यों के जिला मजिस्ट्रेट /जिला कलेक्टर
- भूजल के नियन्त्रण एवं विनियमन हेतु अधिसूचित क्षेत्र
- राजपत्रित अधिसूचनाएं
- संशोधित राजपत्रित अधिसूचनाएं
- उद्योगों द्वारा भूजल स्वीकृति संबंधी आवेदन पत्र
- अवसंरचनात्मक विकास परियोजनाओं द्वारा भूजल स्वीकृति संबंधी आवेदन पत्र
- सीजीडब्ल्यूए की नीति संबंधी संबंधी दिशानिदेश
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली-दक्षिण एवं दक्षिण पश्चिम जिलों के प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति
- नागरिक निकायों को निर्देश
- अधिसूचित क्षेत्रों के लिए अधिकृत अधिकारी
- सीजीडब्ल्यूबी में सीजीडब्ल्यूए के नोडल अधिकारियों की सूची
- पेय एवं घरेलू उपयोगों के लिए नलकूप/बोरवेल के निर्माण संबंधी संशोधित दिशानिर्देश
- भूजल अपाहरण संबंधी प्रस्तावों के मूल्यांकन हेतु अनुमोदित दिशानिर्देश
- वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान सीजीडब्ल्यूए द्वारा जारी, नवीकरण किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तथा प्राप्त प्रस्तावों की स्थिति
- वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान सीजीडब्ल्यूए द्वारा जारी , नवीकरण किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तथा प्राप्त प्रस्तावों की स्थिति
- वित्त वर्ष 2010-11 के दौरान सीजीडब्ल्यूए द्वारा जारी , नवीकरण किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तथा प्राप्त प्रस्तावों की स्थिति
- सार्वजनिक सूचना संख्या 26-1/सीजीडब्ल्यूए/डी-1/09 की अनुसूची
- सार्वजनिक सूचना संख्या 26-1/सीजीडब्ल्यूए/डी-1/09 का अनुलग्नक